Hindi Kahaniya | हिंदी कहानियां । बेस्ट Moral कहानी। मोटिवेशनल कहानी । Hindi stories

Hindi Kahaniya

दोस्तो, आज हम लोग कई प्रेरक कहानियों के बारे में बात करेंगे, जो आपके मन और तन को नई उत्तेजना से भर देगा। इन कहानियों में इतनी शक्ति है कई ये आपकी जिंदगी को एक नया रूप दे सकता है।

चलिए दोस्तो अब सुरु करते है, हिंदी कहानियां (Hindi Kahaniya)

सर्प और नेवला की कहानी: Moral Hindi Kahaniya ( नैतिक कहानियां)

एक जंगल में सर्प, चूहा और नेवला रहा करता था। चूहा और नेवला काफी अच्छे दोस्त थे। नेवला और सर्प की दुश्मनी जग जाहिर थी। चूहा और नेवला साथ – साथ जिंदगी के खट्टे – मीठे पलों का आनंद उठाते थे।

एक दिन किसी बात पे चूहा और नेवला में किसी बात पे लड़ाई हो गई, तब चूहा नेवला से दोस्ती तौर कर अपने घर चला गया। उसके बाद कई दिनों तक दोनों में कोई बातचीत नहीं हुआ। कई दिनों के बाद दोनों किसी काम के चक्कर में एक दूसरे से टकरा गए, मिलने के बाद दोनों फिर से पुरने बातो पे लड़ाई होने लगी। इस बार नेवला अपनी बातो की माफ़ी मांगना चाहता था, लेकिन बात नहीं बनी।

चूहा गुस्सा होकर बदला लेने के चक्कर में अपने दुश्मन सर्प से जा कर मिला और सर्प से अपने हार का बदला लेना को कहता है। सर्प उस समय तो मान जाता है लेकिन चूहा के जाने के बाद सोचता है क्यों ना मुझे चूहे को कहा लेना चाहिए। सोचता है कि अगली बार जब भी चूहा से मिलेगा, उसे कहा जागे गा।

इस hindi Kahaniya में आपको मजा आ रहा होगा।

कुछ दिनों के बाद चूहा फिर से सर्प से मिलता है और सर्प से कहता है कि उसे उसका बदला नेवला से बदला लेना होगा। जैसे ही सर्प चूहा को खाना चाहता है कि वैसे ही नेवला उस जगह आ जाता है। उसके बाद चूहे को बचाने के चककर में नेवला – सर्प में काफ़ी भयानक लड़ाई होना सुरू हो जाता है, काफी देर लड़ाई के बाद नेवला जीत जाता है। उसके बाद दोनों एक एक – दूसरे से अपनी गलती मांगते है।

Moral of this Hindi Kahaniya:

  1. अंत भला तो सब भला।
  2. हमे दोस्तो को समझना चाईए।

मुर्गी चोर की कहानी ( Moral stories in Hindi )

तुला राम नाम एक इंसान एक पटना नाम के जगह पे रहता था। वो अपने परिवार को कहता था कि तुला राम नाम मुर्गा का बिज़नेस मैन है, किन्तु ओह आसपास की मुर्गी हो को चोरी कर कर भेज देता था। पत्नी एक बार कहती है कि आप कहते हैं कि आप बिजनेसमैन है लेकिन आपने कभी अपना मुर्गी का फॉर्म हमें नहीं दिखाया, हमारे कुछ रिश्तेदार यहां आ रहे हैं उन्हें जरूर दिखा दीजिएगा। कुछ देर तो तुलाराम सोच में पड़ गया और फिर सोच कर बोला, ओ पगली… मैं मुर्गी को पालता नहीं बल्कि उसे ग्रिल करके लोग को खिलाता हूं।

अगले ही दिन तुलाराम बगल वाली गांव में पहुंचता है, वहां पर एक मुर्गी ग्रिल करने वाले से मिलता है, मुर्गी ग्रिल करने वाले से कहता है भाई कल के लिए मुझे अपनी मशीन दे दो, कल जो कमाई होगी, वह भी तेरी और मैं मुर्गी खुद ही लाऊंगा।

इस kahaniya in hindi में आपको मजा आ रहा होगा।

अगले दिन तुलाराम के कुछ रिश्तेदार लोग आते हैं और तुलाराम उन सभी लोगों को दूसरे गांव जाता है जहां जहां कि उसने अगले दिन ग्रिल करने वाले व्यापारी से मुर्गा ग्रिल का सौदा किया था और सभी को दिखाता है देखिए यह जगह पर मैं काम करता हूं।

तुलाराम के बार-बार प्रयास करने के बाद भी वह मुर्गा को ग्रिल नहीं कर पाता है और मुर्गा हर बार जल जाता है। तुलाराम के रिश्तेदारों को ऐसा होता है कि तुलाराम झूठ बोल रहा है। सभी लोग घर आ जाते हैं और उसने मुर्गा चोरी करना कम कर दिया है अब वह रोज एक या दो मुर्गा चोरी करता है गांव से। गो

नाम का मुर्गा पालक उसी गांव में रहता है। गोपीनाथ के मुर्गे काफी अच्छे रहते हैं। तुलाराम को मोरया को देखकर मुंह में फिर से चोरी करने की लालच जाग उठा है। गोपीनाथ अपने मुर्गो से कैसे प्यार करता है वह रोज सोने से पहले उसे टोकरी के नीचे छुपा के रख देता है। पहले कैसियो गोपीनाथन टोकरी के नीचे छुपा कर जाता है तुलाराम लेता है यह सिलसिला कई दिनों तक चलता है।

उसके बाद एक दिन सबसे से थक हार कर गोपीनाथ मुर्गा छुपाने की जगह टोकरी के नीचे मुर्गा रखने की जगह एक कुत्ते को बैठा देता है। हर दिन की भांति आज भी तुलाराम मुर्गे को चोरी करने आता है और उसे कुत्ता काट लेता है और उसे जोर जोर से चिल्ला कर 12:00 बजे रात पर पूरे गांव में घूमता रहता है।

Moral of the story-

  • चोरी नहीं करना चाहिए।
  • चाहे कितना भी बुरा हो जाए हमें धैर्य से अपना काम करना चाहिए।

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